उद्देश्य और लक्ष्य||Objectives & Goals

    प्राचीन समय में हमारे देश में गुरुकुलों की समृद्ध परंपरा थी| कालान्तर में विदेशी आक्रमणों, चिरपरवशता के कारण वो मंद पड़ गयी|समय समय पर अनेक ऋषियों ने शास्त्र की शुद्ध शिक्षा प्रणाली को जीवित रखने हेतु गुरुकुल पुनर्स्थापना का आह्वान किया, वेद मार्ग को प्रशस्त किया|वेदों से उद्भूत और वैदिक ऋषि-मनीषियों द्वारा सहस्त्रों वर्षों तक पुष्पित व पल्लवित आत्मा, परमात्मा और प्रकृति को जानने की विद्या वैदिक अध्यात्म विद्या है।

||विद्ययाऽमृतमश्नुते||    -यजुर्वेद ४०/१४।।

|| सा विद्या या विमुक्तये||  -विष्णु पु. १/१९/४१।।

अर्थात् विद्या वही है जिससे व्यक्ति को मुक्ति अर्थात् अमृतत्व प्राप्त होता है|

|| विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्||            – प्रसंगाभरणम् ८।।

अर्थात विद्या सभी प्रकार के धनों में प्रधान है|

   भारतीय वैदिक संस्कृति का सर्वश्रेष्ठ पहलु उसकी यही अध्यात्म-विद्या ही है।

Arya Samaj is the socio-religious movement founded by Swami Dayanand Saraswati in 1875. Arya Samaj became popular in general masses and got spread in more than 32 countries around the globe. This caused need of administrative body to administer the vast organization of Arya Samaj Temples and Institutions.