निम्न भावी परियोजनायें विचाराधीन हैं जिनके हेतु इच्छुक भामाशाह अपना सहयोग अंशदान तन-मन-धन किसी भी रूप में कर सकते हैं| गुरुकुल को अपने कार्यों को सुगमता से चलाने व उसे प्रभावी रूप देने के लिये निम्न साधनों की आवश्यकता है जिसके लिये दानी महानुभावों से आशा की जाती है कि सहयोग करेंगे|
- परिशिष्ट
महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती (१८२४-१८८३) –ओज और तेज से परिपूर्ण शुद्ध चैतन्य ब्रह्मचारी, वेद मंत्रदृष्टा ऋषि, आधुनिक भारत में वेदों के पुनर्स्थापक, आध्यात्मिक उत्कर्ष के पर्याय, गहन चिंतक और महान समाज-सुधारक, प्रेरणा स्त्रोत|

